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मौसम कोई भी हो शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए

Adhunik Samachar

यह बात इतनी आम है कि हम सभी जानते हैं कि हमें एक दिन में लगभग 8 गिलास पानी की आवश्यकता होती है

यह बात इतनी आम है कि हम सभी जानते हैं कि हमें एक दिन में लगभग 8 गिलास पानी की आवश्यकता होती है। लेकिन शायद यह आप नहीं जानते की हमारे शरीर के लिए आवश्यक द्रव की जरूरत पूरी करने के लिए पानी से ही काम नहीं चलता। हमें अन्य द्रवों व भोजन में मौजूद द्रव की भी आवश्यकता होती। भोजन को पचा कर उससे पोषक पदार्थ ग्रहण करने के लिए। जूस व दूध हमारे शरीर के लिए जरूरी द्रव उपलब्ध कराते हैं। लेकिन याद रखिए 8 गिलास पानी की खुराक में शराब का शुमार नहीं हो सकता क्यों कि इससे डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) होता है, हाइड्रेशन (जलयोजन) नहीं होता। एल्कोहॉल की ही तरह कैफीन युक्त पेय पदार्थों का शुमार भी जरूरी द्रव में नहीं होता।

इसमें कोई शक नहीं की जल ही सर्वोत्तम द्रव है और हमें पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। लेकिन हमें ठीक-ठीक कितना पानी-पीना चाहिए इस पर अभी तक विवाद ही है। एक दिन में 8 गिलास पानी की सिफारीश हर मौसम, हर प्रदेश, हर व्यक्ति पर लागू नहीं हो सकती। यह भी हो सकता है कि बरसात या सर्दी के मौसम में 8 गिलास पानी पी कर कोई दिन भी टॉयलेट ही आता जाता रहे और टिक कर कोई काम ही न कर पाए या फिर गर्म मौसम में 8 गिलास पानी पी कर भी वह प्यासा ही रहे। वैसे एक अनुमान के अनुसार पूरी दुनिया में हर साल जिस बीमारी का शिकार लगभग दो अरब लोग होते हैं वह है , चक्कर आना व मोशन सिकनैस। इसके लक्षण हैं -
जी मचलना, उल्टियां

चक्कर आना आदि और इसमें हाइड्रेशन प्रमुख है।

गर्मी और बरसात के आते ही यात्रियों के लिए स्वास्थ्य संबंधी दो खतरनाक बीमारियां अतिसार (टै्रव्लर्स डायरिया)और सिकनेस (टै्रव्लर्स सिकनेस) विचार करने योग्य हैं। यदि आप अपनी छुट्ड्ढिटयां बिताने के लिए पहले से ही योजना बना चुके हैं लेकिन बिना यह जानें कि यदि आप बीमार हो गए तो कैसे अपनी देखभाल करेंगे? ऐसा सामान्यतरू दूषित साफ-सफाई स्थितियों द्वारा होता है और दूूषित भोजन व पानी के सेवन द्वारा भी ऐसा होता है। यद्यपि कुछ कारणों जैसे कि थकावट, धीरे-धीरे चलना और डाइट या मौसम में परिवर्तन द्वारा भी ऐसा प्रेरित हो सकता है।

इस संक्रमण के कुछ महत्वपूर्ण लक्षण जो कि तीन से सात दिनों तक व्यक्ति को परेशान करते हैं, जिसमें अतिसार, जी मचलना, पेट में सिकुडन, सूजन, बुखार और शरीर में हमेशा दर्द रहना आदि शामिल हैं। अतिसार के प्रभाव को कम करने की संभावनाओं के लिए यात्रा के दौरान आप जो जल पान करते हैं या जो भोजन खाते हैं, उसके बारे में अत्याधिक सावधान रहना चाहिए। यह जरूरी है कि आप के शरीर द्वारा नष्टड्ढ हुए तरल पदार्थ व नमक की मात्रा को परिवर्तन करना। इस का सबसे बहतरीन तरीका है ओरल रिहाईड्रेशन सोल्यूशन (ओ आर एस) का घोल पीना। इसी तरह एंटीडाएरहिल्स (जैसे इमोडियम एडी) पेट में पड़ी सिकुडन को कम कर सकती है और अतिसार संबंधी बीमारियों को काफी हद तक निम्र कर देती हैं।

कब शरीर को पानी की आवश्यकता होती है।

व्यायाम के वक्त के अलावा गर्म मौसम में ज्यादा रेशों वाले भोजन के कारण (रेशे काफी पानी इस्तेमाल करते हैं) और वजन घटाने में (कई लोग सोचते हैं की वे ज्यादा पानी पिएंगे तो फूल जाएगे) लेकिन ऐसा नहीं होता। शरीर उतना ही पानी रखता है जितना उसे चाहिए। बाकी निकाल देता है। ऊंचे पहाड़ों पर जहां सूखी हवा चलती है और वाष्पीकरण तेजी से होता है। यात्रा के समय, विशेषकर हवाई यात्रा के वक्त जब उसी स्थान में वायु का पुनरू संचरण होता है और हवा अपनी नमी खो देती है। यदि आप अपना ज्यादातर समय घर या दफ्तर के अंदर बिताते हैं, जहां पर्याप्त ताजी हवा नहीं मिल पाती।

ज्यादा समय तक बीमार रहने के कारण जैसे सर्दी लगना या ब्लैडर में संक्रमण के कारण। बुखार, उल्टी, दस्त के कारण शरीर का काफी पानी कम हो जाता है और उस कमी को फिर से पूरा करने की आवश्यकता होती है। यदि आप प्रोटीन से भरपूर भोजन ले रहे हैं, तो प्रोटीन को तोडने के लिए शरीर को अधिक पानी की आवश्यक होती है। पानी की कमी होने से स्वस्थ व्यक्ति में भी गंभीर लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे बहुत थकान, पोस्चरल हाइपोटेंशन, गुर्दा फेल और अंततरू मौत भी हो सकती है। इस लिए कोई भी मौसम हो चाहे सर्द या गरम, हर दिन में 8 से 10 गिलास पानी यानी 2 से ढाई लीटर पानी पीना चाहिए ताकि आप में जल की कमी न होने पाए।

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कि आप के शरीर में पानी की कमी पहले होती है और आप को प्यास बाद में लगती है, यानी जब आप को प्यास महसूस होती है, तो समझ लीलिए की शरीर में कुछ पानी कम हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे पहले की आप को प्यास लगे, पानी पी लीजिए। अगर आप व्यायाम कर रहे हैं तो आप को थोड़ा पानी पीते रहना है। यही नहीं अगर आप तेज चाल वाली सैर या हल्की फुल्की जॉगिंग के लिए भी जा रहे हैं तो भी आप को शुरू में, उसके दौरान व उसके बाद पानी पीना चाहिए। मौसम कोई भी, आप के शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार जलयोजन (हाइड्रेशन) के लिए कुछ टिप्स इस प्रकार हैं-

  • दिन की शुरूआत एक कप गर्म पानी पी कर करें, जिसमें एक ताजे नीेंबू का रस मिला हो।
  • दिन व रात के भोजन का आरंभ एक कटोरे सूप के साथ करें।
  • जब भी बाहर जाएं पानी की एक बोतल अवश्य साथ रखें।
  • कैफीन रहित चाय व काफी को प्राथमिकता दें।
  • कभी बाहर खाने जाएं तो अपने मेन्यू में पेय पदार्थों को अवश्य शामिल करें।
  • गर्म दिनों में शरबत, लस्सी आदि हर रोज लें।
  • दूध, जूस या पानी को भोजन से पहले या आप का पेट भर चुका होगा और फिर आप इन्हें लेना नहीं चाहेंगे और दैनिक खुराक में फल व सब्जियों को शामिल करें क्यों कि इनमें काफी पानी होता है जो आप के शरीर की आवश्यकता के लिए जरूरी है।

सौ प्रतिशत फ्रूट जूस से नहीं बढ़ता वजन

एक अध्ययन के मुताबिक शत प्रतिशत शुद्घ फ्रूट जूस पीने से बच्चों का वजन नहीं बढ़ता अभी तक यही माना जाता था कि फलों का रस पीने से मोटापा बढ़ता है। विशेषज्ञों द्वारा अभिभावकों को यही सलाह दी जाती थी कि वे अपने बच्चों को बहुत ज्यादा फू्रट जूस न पिलाएं क्यों कि वजन बढने के लिए जिम्मेदार कारणों में से यह भी एक है। किंतु हाल ही 2007 में हुए एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि यदि फलों का रस शत प्रतिशत शुद्घ हो और उसमें शर्करा न मिली हो तो वह मोटापे का कारण नहीं बनता।